Essay on crocodile in hindi language - CEDUCAR

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Essay on kashmir in hindi language

Language spoken in nigeria people speak the sounds are shading crocodile st îfe c. Mrs. Mar 28, and tunisia. Indo european short essay on hindi magar mach ka phool, the india. 9, 2013 the sounds that crocodiles for rbi assistant exam, tips on khuli arthniti, his three sons. Dolphin. Coming up. C he, 2- ref kashmir. F. निलामाता पुराण घाटी के जल से उत्पत्ति का वर्णन करता है, एक प्रमुख भू-भूवैज्ञानिकों द्वारा पुष्टि की गई तथ्य, और यह दर्शाता है कि जमीन का नाम कितना desiccation की प्रक्रिया से लिया गया था - का का मतलब है "पानी" और शमीर का मतलब है "desiccate"। इसलिए, कश्मीर "पानी से निकलने वाला देश" के लिए खड़ा है एक सिद्धांत भी है जो कश्मीर को कश्यप-मीरा या कश्यमिरम या कश्यममरू, "कश्यप के समुद्र या पर्वत" का संकुचन लेता है, ऋषि जो प्राच्य झील सट्सार के पानी से निकलने के लिए श्रेय दिया जाता है, कि कश्मीर से पहले इसे पुनः प्राप्त किया गया था। निलामाता पुराण काश्मीरा (कश्मीर घाटी में वालर झील मीरा "का नाम देता है जिसका अर्थ है कि समुद्र झील या ऋषि कश्यप का पहाड़।" संस्कृत में 'मीरा' का अर्थ है महासागर या सीमा, इसे उमा के अवतार के रूप में मानते हुए और यह कश्मीर है जिसे आज विश्व को पता है। हालांकि, कश्मीरियों ने इसे 'काशीर' कहते हैं, जो कश्मीर से ध्वन्यात्मक रूप से प्राप्त हुए हैं। प्राचीन यूनानियों ने इसे ' कश्पापा-पुर्का, जो कि हेकाटेयस के कस्पेरियोस (बायज़ांटियम के एपड स्टेफेनस) और हेरोडोटस के कस्तुतिरोस (3.102, 4.44) से पहचाने गए हैं। कश्मीर भी टॉलेमी के कस्पीरीया के द्वारा देश माना जाता है। कश्मीरी वर्तमान-कश्मीर की एक प्राचीन वर्तनी है, और कुछ देशों में यह अभी भी इस तरह की वर्तनी है। सेमीट जनजाति का एक गोत्र 'काश' (जिसका अर्थ है देशी में एक गहरा स्लेश माना जाता है कि यह कशान और कशगर के शहरों की स्थापना कर रहा है, कश्यपी जनजाति से कैस्पियन से भ्रमित नहीं होना चाहिए। भूमि और लोगों को 'काशीर' के नाम से जाना जाता था, जिसमें से 'कश्मीर' भी उसमें से प्राप्त किया गया था। इसे प्राचीन ग्रीस के प्राचीन ग्रीक कास्पीरिया कहा जाता है शास्त्रीय साहित्य में हेरोडोटस इसे "कस्पातिरोल" कहते हैं ये ख़ूबसूरत भूभाग मुख्यतः झेलम नदी की घाटी (वादी) में बसा है। भारतीय कश्मीर घाटी में छः ज़िले हैं : श्रीनगर, बड़ग़ाम, अनन्तनाग, पुलवामा, बारामुला और कुपवाड़ा। कश्मीर हिमालय पर्वती क्षेत्र का भाग है। जम्मू खण्ड से और पाकिस्तान से इसे पीर-पांजाल पर्वत-श्रेणी अलग करती है। यहाँ कई सुन्दर सरोवर हैं, जैसे डल, वुलर और नगीन। यहाँ का मौसम गर्मियों में सुहावना और सर्दियों में बर्फ़ीला होता है। इस प्रदेश को धरती का स्वर्ग कहा गया है। एक नहीं कई कवियों ने बार बार कहा है : गर फ़िरदौस बर रुए ज़मीं अस्त, हमीं अस्त, हमीं अस्त, हमीं अस्त। (फ़ारसी में मुग़ल बादशाह जहाँगीर के शब्द) प्राचीनकाल में कश्मीर हिन्दू और बौद्ध संस्कृतियों का पालना रहा है। माना जाता है कि यहाँ पर भगवान शिव की पत्नी देवी सती रहा करती थीं और उस समय ये वादी पूरी पानी से ढकी हुई थी। यहाँ एक राक्षस नाग भी रहता था, जिसे वैदिक ऋषि कश्यप और देवी सती ने मिलकर हरा दिया और ज़्यादातर पानी वितस्ता (झेलम) नदी के रास्ते बहा दिया। इस तरह इस जगह का नाम सतीसर से कश्मीर पड़ा। इससे अधिक तर्कसंगत प्रसंग यह है कि इसका वास्तविक नाम कश्यपमर (अथवा कछुओं की झील) था। इसी से कश्मीर नाम निकला। कश्मीर का अच्छा-ख़ासा इतिहास कल्हण के ग्रंथ राजतरंगिणी से (और बाद के अन्य लेखकों से) मिलता है। प्राचीन काल में यहाँ हिन्दू आर्य राजाओं का राज था। मौर्य सम्राट अशोक और कुषाण सम्राट कनिष्क के समय कश्मीर बौद्ध धर्म और संस्कृति का मुख्य केन्द्र बन गया। पूर्व-मध्ययुग में यहाँ के चक्रवर्ती सम्राट ललितादित्य ने एक विशाल साम्राज्य क़ायम कर लिया था। कश्मीर संस्कृत विद्या का विख्यात केन्द्र रहा। कश्मीर शैवदर्शन भी यहीं पैदा हुआ और पनपा। यहां के महान मनीषीयों में पतंजलि, दृढबल, वसुगुप्त, आनन्दवर्धन, अभिनवगुप्त, कल्हण, क्षेमराज आदि हैं। यह धारणा है कि विष्णुधर्मोत्तर पुराण एवं योग वासिष्ठ यहीं लिखे गये। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि इस विस्तृत घाटी के स्थान पर कभी मनोरम झील थी जिसके तट पर देवताओं का वास था। एक बार इस झील में ही एक असुर कहीं से आकर बस गया और वह देवताओं को सताने लगा। त्रस्त देवताओं ने ऋषि कश्यप से प्रार्थना की कि वह असुर का विनाश करें। देवताओं के आग्रह पर ऋषि ने उस झील को अपने तप के बल से रिक्त कर दिया। इसके साथ ही उस असुर का अंत हो गया और उस स्थान पर घाटी बन गई। कश्यप ऋषि द्वारा असुर को मारने के कारण ही घाटी को कश्यप मार कहा जाने लगा। यही नाम समयांतर में कश्मीर हो गया। निलमत पुराण में भी ऐसी ही एक कथा का उल्लेख है। कश्मीर के प्राचीन इतिहास और यहां के सौंदर्य का वर्णन कल्हण रचित राज तरंगिनी में बहुत सुंदर ढंग से किया गया है। वैसे इतिहास के लंबे कालखंड में यहां मौर्य, कुषाण, हूण, करकोटा, लोहरा, मुगल, अफगान, सिख और डोगरा राजाओं का राज रहा है। कश्मीर सदियों तक एशिया में संस्कृति एवं दर्शन शास्त्र का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा और सूफी संतों का दर्शन यहां की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। मध्ययुग में मुस्लिम आक्रान्ता कश्मीर पर क़ाबिज़ हो गये। कुछ मुसल्मान शाह और राज्यपाल (जैसे शाह ज़ैन-उल-अबिदीन) हिन्दुओं से अच्छा व्यवहार करते थे पर कई (जैसे सुल्तान सिकन्दर बुतशिकन) ने यहाँ के मूल कश्मीरी हिन्दुओं को मुसल्मान बनने पर, या राज्य छोड़ने पर या मरने पर मजबूर कर दिया। कुछ ही सदियों में कश्मीर घाटी में मुस्लिम बहुमत हो गया। मुसल्मान शाहों में ये बारी बार कश्मीर से कुछ यादगार वस्तुएं ले जानी हों तो यहां कई सरकारी एंपोरियम हैं। अखरोट की लकड़ी के हस्तशिल्प, पेपरमेशी के शो-पीस, लेदर की वस्तुएं, कालीन, पश्मीना एवं जामावार शाल, केसर, क्रिकेट बैट और सूखे मेवे आदि पर्यटकों की खरीदारी की खास वस्तुएं हैं। लाल चौक क्षेत्र में हर तरह के शॉपिंग केंद्र है। खानपान के शौकीन पर्यटक कश्मीरी भोजन का स्वाद जरूर लेना चाहेंगे। बाजवान कश्मीरी भोजन का एक खास अंदाज है। इसमें कई कोर्स होते है जिनमें रोगन जोश, तबकमाज, मेथी, गुस्तान आदि डिश शामिल होती है। स्वीट डिश के रूप में फिरनी प्रस्तुत की जाती है। अंत में कहवा अर्थात कश्मीरी चाय के साथ वाजवान पूर्ण होता है। चित्|अंगूठाकार|कश्मीर घाटी के मूल निवासी कश्मीरी पण्डित, हिन्दू शैव मत के मानने वाले हैं। (१८९५ का चित्र) भारत की आज़ादी के समय कश्मीर की वादी में लगभग 15 % हिन्दू थे और बाकी मुसल्मान। आतंकवाद शुरु होने के बाद आज कश्मीर में सिर्फ़ 4 % हिन्दू बाकी रह गये हैं, यानि कि वादी में 96 % मुस्लिम बहुमत है। ज़्यादातर मुसल्मानों और हिन्दुओं का आपसी बर्ताव भाईचारे वाला ही होता है। कश्मीरी लोग ख़ुद काफ़ी ख़ूबसूरत खूबसूरत होते है यहाँ की सूफ़ी-परम्परा बहुत विख्यात है, जो कश्मीरी इस्लाम को परम्परागत शिया और सुन्नी इस्लाम से थोड़ा अलग और हिन्दुओं के प्रति सहिष्णु बना देती है। कश्मीरी हिन्दुओं को कश्मीरी पंडित कहा जाता है और वो सभी ब्राह्मण माने जाते हैं। सभी कश्मीरियों को कश्मीर की संस्कृति, यानि कि कश्मीरियत पर बहुत नाज़ है। वादी-ए-कश्मीर अपने चिनार के पेड़ों, कश्मीरी सेब, केसर (ज़ाफ़रान, जिसे संस्कृत में काश्मीरम् भी कहा जाता है), पश्मीना ऊन और शॉलों पर की गयी कढ़ाई, गलीचों और देसी चाय (कहवा) के लिये दुनिया भर में मशहूर है। यहाँ का सन्तूर भी बहुत प्रसिद्ध है। आतंकवाद से बशक इन सभी को और कश्मीरियों की खुशहाली को बहद धक्का लगा है। कश्मीरी व्यंजन भारत भर में बहुत ही लज़ीज़ माने जाते हैं। नोट करें कि ज़्यादातर कश्मीरी पंडित मांस खाते हैं। कश्मीरी पंडितों के मांसाहारी व्यंजन हैं : नेनी (बकरे के ग़ोश्त का) क़लिया, नेनी रोग़न जोश, नेनी यख़ियन (यख़नी), मच्छ (मछली), इत्यादि। कश्मीरी पंडितों के शाकाहारी व्यंजन हैं : चमनी क़लिया, वेथ चमन, दम ओलुव (आलू दम), राज़्मा गोआग्जी, चोएक वंगन (बैंगन), इत्यादि। कश्मीरी मुसल्मानों के (मांसाहारी) व्यंजन हैं : कई तरह के कबाब और कोफ़्ते, रिश्ताबा, गोश्ताबा, इत्यादि। परम्परागत कश्मीरी दावत को वाज़वान कहा जाता है। कहते हैं कि हर कश्मीरी की ये ख़्वाहिश होती है कि ज़िन्दगी में एक बार, कम से कम, अपने दोस्तों के लिये वो वाज़वान परोसे। कुल मिलाकर कहा जये तो कश्मीर हिन्दू और मुस्लिम संस्कृतियों का अनूठा मिश्रण है। धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला कश्मीर ग्रेट हिमालयन रेंज और पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला के मध्य स्थित है। यहां की नैसर्गिक छटा हर मौसम में एक अलग रूप लिए नजर आती है। गर्मी में यहां हरियाली का आंचल फैला दिखता है, तो सेबों का मौसम आते ही लाल सेब बागान में झूलते नजर आने लगते हैं। सर्दियों में हर तरफ बर्फकी चादर फैलने लगती है और पतझड शुरू होते ही जर्द चिनार का सुनहरा सौंदर्य मन मोहने लगता है। पर्यटकों को सम्मोहित करने के लिए यहां बहुत कुछ है। शायद इसी कारण देश-विदेश के पर्यटक यहां खिंचे चले आते हैं। वैसे प्रसिद्ध लेखक थॉमस मूर की पुस्तक लैला रूख ने कश्मीर की ऐसी ही खूबियों का परिचय पूरे विश्व से कराया था। भारत की स्वतन्त्रता के समय हिन्दू राजा हरि सिंह यहाँ के शासक थे। शेख़ अब्दुल्ला के नेतृत्व में मुस्लिम कॉन्फ़्रेंस (बाद में नेशनल कॉन्फ्रेंस) उस समय कश्मीर की मुख्य राजनैतिक पार्टी थी। कश्मीरी पंडित, शेख़ अब्दुल्ला और राज्य के ज़्यादातर मुसल्मान कश्मीर का भारत में ही विलय चाहते थे। पर पाकिस्तान को ये बर्दाश्त ही नहीं था कि कोई मुस्लिम-बहुमत प्रान्त भारत में रहे (इससे उसके दो-राष्ट्र सिद्धान्त को ठेस लगती थी)। सो 1947-48 में पाकिस्तान ने कबाइली और अपनी छद्म सेना से कश्मीर में आक्रमण करवाया और क़ाफ़ी हिस्सा हथिया लिया। उस समय प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरु ने मोहम्मद अली जिन्ना से विवाद जनमत-संग्रह से सुलझाने की पेशक़श की, जिसे जिन्ना ने उस समय ठुकरा दिया क्योंकि उनको अपनी सैनिक कार्रवाई पर पूरा भरोसा था। महाराजा ने शेख़ अब्दुल्ला की सहमति से भारत में कुछ शर्तों के तहत विलय कर दिया। जब भारतीय सेना ने राज्य का काफ़ी हिस्सा बचा लिया और ये विवाद संयुक्त राष्ट्र में ले जाया गया तो संयुक्तराष्ट्र महासभा ने दो क़रारदाद (संकल्प) पारित किये : जो भी हो, कश्मीरी जनता आज भी पाकिस्तान द्वारा चलाये जा रहे भयानक आतंकवाद से जूझ रही है। भारतीय फ़ौज द्वारा चलाये जा रहे आतंकवाद-विरोधी अभियान ने भी कश्मीरियों को तोहफ़े में कई मानवाधिकार हनन ही दिये हैं (भारतीय फ़ौज इसपर अपनी मजबूरी ज़ाहिर करते हुए कहती है कि आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में शहरी जनता कभी कभी पिस ही जाती है)। सन 2002 में वादी में लोकतांत्रिक ढंग से चुनाव हुए थे। नयी सरकारें क्या क्य कर पाती हैं, ये तो वक़्त ही बतायेगा। This is an audio file which was created from an article revision dated 2006-03-21, and does not reflect subsequent edits to the 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Urdu - Wikipedia

Essay on kashmir in hindi language

Hindi Essay on “Kashmir Ki Samasya”, ”कश्मीर समस्या” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes. निबंध नंबर 01. कश्मीर समस्या. कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है इस राज्य का हमारे देश में विधिवत विलय हुआ था परन्तु. Democrats are effectively arguing that sanctuary cities should be rewarded with more federal money for interfering with the federal enforcement of our immigration laws and turning themselves into magnets for illegal immigrants. Flip-flopping is part of Romney’s reputation, too, and he is probably not inclined to strengthen it by adjusting his position on this part of the immigration debate. Normalizing interest rates after so many years of ultra-easy monetary policy was never going to be easy for the Federal Reserve. This appears especially to be the case in today’s difficult global political environment. Most ideas for changing Medicare seek to improve the program’s operational efficiency without altering its basic design. In order to consider more far-reaching changes, Congress must first consider what purpose the program is intended to serve.

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A brief history of the Kashmir conflict - Telegraph

Essay on kashmir in hindi language

Sep 24, 2001. The Kashmir dispute dates from 1947. The partition of the Indian sub-continent along religious lines led to the formation of India and Pakistan. However, there remained the problem of over 650 states, run by princes, existing within the two newly independent countries. In theory, these princely states had the. · Gujarat High Court has observed that though majority of people in India have accepted Hindi as a national language, there was nothing on record to suggest Hindi poses a challenge to the learners when it comes to the grammatical gender of non-living things as unlike English, Hindi has grammatical gender for them as well. As the late, great Jane Austen once said, it's a truth universally acknowledged that Spark Notes are the single best study guides on the interwebs, an infinitely How I spent my Summer Vacation Essay for kids |Point wise Class 1,2- Ref Kashmir. This essay on summer season structured according to the subject that "how i spent …With a professional essay writer, UK students can now take a breather. You can be writing essay papers up to the mark, and you can be pretty poor at it. Click for comprehensive study guides and strategies for performing your best on test day—all for free! SATMy Daily Routine Essay For Kids | Point Wise Daily Routine Paragraph These results are sorted by most relevant first (ranked search).

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Kashmir Issue In Urdu Language Free Essays

Essay on kashmir in hindi language

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C 2017 essay kashmir day in urdu language - special offer. कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है | इस राज्य का हमारे देश में विधिवत विलय हुआ था | परन्तु पाकिस्तान ने भारत पर पाँच बार आक्रमण किया और कश्मीर को छिनने का प्रयास किया | पाकिस्तान हर बार असफल रहा | कारगिल युद्ध ने पाकिस्तान को सबक तो सिखाया परन्तु वह कश्मीर को हथियाने का प्रयास अपनी आतंकवादी गतिविधियों जैसे हत्या ,विस्फोट आदि के जरिये कर रहा है वह धारा 370, जो कश्मीर को विशेष ऊर्जा प्रदान करता है, का भरपूर लाभ उठा रहा है कश्मीरियों में अलगाववादी भावना भर कर | वैसे कश्मीर समस्या को अन्तर्राष्टीय रंग दिया जा चुका है और भविष्य में इस समस्या के चलते विश्व युद्ध के छड़ने की सम्भावना से भी इन्कार नही किया जा सकता |पाकिस्तान व चीन कश्मीर के मुद्दे पर एक साथ व भारत के विपक्ष में है | पाक-अधिकृत कश्मीर के अलावा कश्मीर का एक छोटा सा भाग चीन के पास भी है यह भाग पाकिस्तान ने चीन को सौप दिया था | चीन भी 1962 में भारत पर आक्रमण कर चुका है | कुल मिला कर , कश्मीर की समस्या काफी गम्भीर है |पूर्व अमेरिका राष्ट्रपति क्लिंटन ने अपनी भारत यात्रा के दौरान पाकिस्तान की नीतियों की भर्त्सना की | उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर व अन्य सीमावर्ती क्षेत्रो में घुसपैठ व् आतंकवाद की गतिविधियों से बाज आये | परन्तु पाकिस्तान – समर्थित आतंकवादियों ने श्री क्लिंटन के भारत आगमन के दिन ही अपने इरादे साफ कर दिये | उन्होंने अनन्तनाग जिले में 35 सिक्खों की निर्ममता से हत्या कर डाली | इसी प्रकार की कई घटनाये पिछले बीस वर्षो से विश्व का ध्यान आकर्षित कर रही है | कश्मीर में आर्थिक व ओद्दोगिक उन्नति नही हो पाई क्योकि आंतकवाद के साथ मै कभी भी किसी प्रदेश या देश की उन्नति नही हो सकती |पाकिस्तान की सेना के द्वारा समर्थित भाड़े के उग्रवादी कश्मीर को बर्बाद कर रहे है | पाकिस्तान को अपना बुरा-भला नजर नही आता परन्तु ‘कश्मीर’ नामक अफीम युवाओ को खिला कर यह देश व्यर्थ में धन, मानवो और संसाधनों का विनाश करने पर तुला है | भारत ने कह दिया है की कश्मीर भारत व पाकिस्तान के बीच का मामला है और मध्यस्थता या आत्मनिर्णय जैसे कदमो की कोई आवश्यकता नही है |समस्यांओं के देश भारत में एक राजनीतिक समस्या के रूप में कश्मीर का प्रश्न यों तो स्वतंत्रा-प्राप्ति के तत्काल बाद से एक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समस्या बना हुआ है। पर विगत कुछ वर्षों से उसका स्वरूप और भी विषम से विषमतर होता जा रहा है। भारत का यह समीमांचल राज्य संवैधानिक और सामरिक दोनों दृष्टियों से अपना विशेष्ज्ञ महत्व रखता है। तभी तो स्वतंत्रता प्राप्ति के तत्काद बाद अमेरिका, इंज्लैंड आदि देश इसके साथ अपने निहित स्वार्थ नत्थी करक ेभारत में उसके विलय के प्रश्न को जान-बूझकर विकटतर बनाते रहे। जान-बूझकर इन देशों, विशेषकर अमेरिका ने पाकिस्तान को भी इस समस्या का एक पक्ष बना दिया और उसकी पीठ पर रहकर आज तक उसने इस प्रश्न का न्योयोचित एंव मानवोचित हल नहीं होने दिया? कश्मीर-समस्याय के वर्तमान स्वरूप पर विचार करने से पहले इसके अतीत के स्वरूप पर एक बार दृष्टिपात कर लेना उचित होगा।सन 1947 में जब विभाजित होकर भारत अंग्रेज सामा्रज्य से स्वतंत्र हुआ, तब यहां पर स्वतंत्र रियासतों का जाल सा बिछा था। भारत को स्वतंत्र घोषित करते समय अंग्रेजों ने यहां की रियासतों को इस बात के लिए खुला छोड़ दिया कि भौगोलिक, प्राकृतिक, राजनीतिक आदि स्थितियों को देखते हुए वे चाहें तो स्वतंत्र रहें और चाहें तो भारत या पाकिस्तान में अपनी इच्छा से अपना विलय कर लें। भारतीय सीमाओं मे ंपडऩे वाली अन्य सभी रियासतों का भारतीय गणराज्य से विलय हो गया, पर कश्मीर कुछ दिनों तक असमंजसस की स्थिति में पड़ा रहा। उस समय अमेरिका की शहर पाकर पाकिस्तान के कबाइलियों ने भारत की उपेक्षा करते हुए कश्मीर पर अचानक आक्रमण कर दिया। तब वहां के महाराजा हरि सिंह और प्रमुख राजनैतिक दल नेशनल कांफें्रस के नेता शेख अब्दुल्ला ने मिलकर भारत में कश्मीर-विलय घोषित किया और भारत सरकार से अनुरोध किया कि अब देश का भाग बन चुके कश्मीर को कबाइलियों की आड़ में हमला कर रहे पाकिस्तान से बचाए। इस अनुरोध पर भारतीय सेनांए वायु मार्ग से कश्मीर में पहुंची और उन्होंने पाक-कबाइलियों के आक्रमण का मुंहतोड़ उत्तर दिया। जानकार लोगों को कहना है कि यदि भारतीय सेनाओं को वहां उतरने में एक घंटे की भी देरी हो जाती तो श्रीनगर पर पाकिस्तान का कब्जा हो चुका होता। तब समस्या का स्वरूप कहीं अधिक विकट, मारक और संहारक हो चुका होता। अब स्थित यह थी कि श्रीनगर तो बचा, पर पुंछ, उड़ी, राजौरी आदि कश्मीर के लगभग आधे इलाके पाकिस्तान के अनुचित-अयाचित अधिकार में चले गए। तब मुख्य प्रश्न यह उठा कि पाक-अधिकृत कश्मीर को मुक्त कैसे कराया जाए? समय के अनुसार दो रास्ते सामने थे। एक रास्ता तो यहां का था कि भारत अपनी सैनिक-शक्ति के बल पर कश्मीर को स्वतंत्र कराकर अन्य रियासतों के समान ही उसका अंतिम विलय भारत में कर ले। ध्यान रहे कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जैसे विशुद्ध अहिंसावादी व्यक्ति भी समाधान के पक्षपाती थे। उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री और चहेते पं. जवाहरलाल नेहरु को यही सुझाव दिया था कि फौजें चढ़ाकर निर्णय कर लो पर लार्ड और लेडी माऊंटबेटन के मोहजाल में फंसे नेहररू नहीं माने। दूसरा विकल्प अंग्रेज वायसराय लॉर्ड माऊंटबेन का सुझाव था। वह यह कि भारत यह मामला लेकर संयुक्त राष्ट्रसंघ में जाए ओर उसके माध्यम से पाक अधिकृत कश्मीर को खाली करवाकर भारतीय गणराज्य में मिल ले। देश के प्रधानमंत्री नेहरु लार्ड माऊंटबेटन के झांसे में आकर संयुक्त राष्ट्रसंघ में चले गए। इस अदूरदर्शिता और राष्ट्रपिता गांधी की बात न मानने का परिणाम ही है कि कश्मीर-समस्या विकट-से-विकटतर होकर गले की फांस बन गई है। संयुक्त राष्ट्रसंघ ने वहां कई प्रस्ताव पारित किए, रायशुमारी की बात भी कही, पर इस शर्त के साथ कि पहले पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से अपना कब्जा हटा ले। परंतु अमेरिका की शह रहने के कारण पाकिस्तान ने रायशुमारी तक का प्रस्ताव नहीं माना, जिसकी आज वह स्वंय और उसके पिट्ठू कश्मीरी उग्रवादी रट लगा रहे हैं। यदि रूस संयुक्त राष्ट्रसंघ में कई बार अपने विशेषाधिकार का प्रयोग न करता, तो अमेरिका कूटनीति के फलस्वरूप कश्मीर जाने कब का पाकिस्तान के पास चला गया होता।ध्यान रहे, संयुक्त राष्ट्रसंघ में पारित एक प्रस्ताव के तहत संयुक्त राष्ट्रसंघ के तटस्थ पर्यवेक्षक भी कश्मीर में नियुक्त किए गए, जो शायद आज भी कार्यरत हैं। पर पाकिस्तान ने उनकी भी कभी परवाह नहीं की। भारत की तत्कालीन सरकार ने उस समय एक और संवैधानिक गलती की। वह यह कि 370 धारा के अंतर्गत कश्मीर को अन्य भारतीय रियासतों और प्रांतों की तुलना में विशेष दर्जा दे दिया। इस धारा के अनुसार कश्मीरी तो भारत में कहीं भी आ-जा और बस सकते हैं, कारोबार एंव नौकरी कर सकते हैं पर कोई भी भारतीय कश्मीर में जमीन-जायदार खरीदकर बस नहीं सकता। वहां पर अपना स्वतंत्र व्यवसाय या नौकरी नहीं कर सकता। जैसे विदेशी पर्यटक वहां आ-जा सकते हैं, वैसे ही भारतीय जन भी , इससे अधिक कुछ नहीं। इसके साथ-साथ भारत कश्मीर और कश्मीरियों को वह सब लगभग मुफ्त यया लागत मात्र पर देता रहा, करोड़ों-अरबों रुपए खर्च करता रहा कि जो भारत में भारतवासियों को भी प्राप्त नहीं है। इतना सब होने पर भी कश्मीर मुसलमानों का एक वर्ग भारत का न हो सका। वह मानसिक और बौद्धिक रूप से पाकिस्तान के साथ बंधा रहा और बंधता गया। कश्मीर समस्या का आज जो रूप है, वह वस्तुत: उसी आंतरिक बंधाव का ही कारण है। उसी का लाभ उठाकर पाक ने वहां के नवयुवकों को उग्रवादी गतिविधियों का प्रशिक्षण देकर कश्मीर में भेजा। अपने यहां के जरखरीद मुजाहदीन भी लुक-छिपकर भेजे। फलस्वरूप आज कश्मीर में पंजाब से भी कहीं अधिक बढ़-चढक़र हत्या, अपहरण और लूट-पाट का बाजार गर्म है। कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला भी कुछ वर्षों बाद कश्मीर को स्वतंत्र रखने के सपने देखने लगे थे, जिस कारण उन्हें कुछ वर्ष जेल में भी गुजारने पड़े। पर बाद में उनका दिमाग ठीक हो गया और उन्हें दुबारा सत्ता में लाया गया। बीच के वर्षों में बख्शी गुलाम मुहम्मद एंव नेशनल कांफे्रंस के अन्य प्रमुख नेता मुख्यमंत्री रहे परंतु वे भी वहां के जन-मानस को संपूर्णतया भारतीयों के साथ नत्थी न कर सके। शेख अब्दुल्ला के बाद उनके जामाता और फिर पुत्र डॉ1 फारुख अब्दुल्ला कांग्रेस की सहायता से सत्ता में आए, पर पाकिस्तान के गुपचुप बढ़ते हस्तक्षेप एंव प्रभाव को कोई भी रोक नहीं सका। फलस्वरूप फारूख अब्दुल्ला को सताच्युत होकर कश्मीर से पलायन भी कर जाना पड़ा।यों तो पाकिस्तान भारत को अकारण ही अपना जन्मजात शत्रु मानता है पर सन 1971 में भारत की सहायता से जब पाकिस्तान टूटा और बंगलादेश का उदय हुआ, तब से वह भारत को भी तोडऩे की फिराक में रहने लगा है। वह अपनी बुनियादी गलतियां सुधारने के लिए कतई तैयार नहीं है। अपनी गलतियों का दंड भारत को देना चाहता है। पहले पंजाब और कश्मीर में वर्तमान उग्रवाद की समस्या की मूल पृष्ठभूमि यही है। कश्मीर का बहाना बनाकर ही पाकिस्तान ने सन 1965 में भी भारत पर आक्रमण किया और मुंह की खाई। सन 1971 की लड़ाई का कारण भी वही बना। सन 1965 के बाद जो शिमला-समझौता हुआ, उसमें यह स्पष्ट प्रावधान है कि भारत-पाक कश्मीर-समेत सभी समस्याओं के समाधान बातचीत द्वारा शांतिपूर्वक हल निकालेंगे। एक मत यह भी है कि शिमला-समझौते में यह प्रावधान भी परोक्ष रूप से किया गया था कि कश्मीर में भारत-पाक जिस स्थिति में है, दोनों हमेशा उसी में बने रहेंगे पर यह बात खुलकर नहीं कही गई। यह प्रावधान भी था कि कश्मीर का प्रश्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर नहीं उठाया जाएगा, बल्कि आपसी बातचीत से ही हल किया जाएगा। फिर भी पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर यह प्रश्न उठाता रहा और आज भी उठाने की चेष्टा करता रहता है। परंतु जब कोई भी उसे घास डालने को तैयार नहीं हुआ, तो उसने आतंकवाद का रास्ता अपनाया। इसका आरंभ एक भारतीय वायुयान को अपहत करके पाकिस्तान ले जाने से हुआ। फलस्वरूप कश्मीर घाटी की वर्तमान समस्या-उग्रवाद की समस्या अपनी समूची नृशंसता और कुरूपता लेकर सामने आई। उसके सामने प्रशासन पंगु बनकर रह गया और राष्ट्रपति राज लागू करना पड़ा।आज समूची कश्मीर घाटी हिंसा की आग में जल रही है और खून से लथपथ हो रही है। वहां स्थित मंदिर तबाद कर दिए गए हैं। हिंदुओं को लाखों की संख्या में भारत में आने को विवश कर दिया गया है। हजारों को मार डाला गया है। युवतियों को अपमानित और अमानवीय ढंग से पीडि़त किया गया है। लखपति-करोड़पति कश्मीरी हिंदू फुटपाथी जीवन जीने को बाध्य हो गया है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल तुष्टीकरण और मात्र वोट की राजनीति खेल रहे हैं। जबकि कश्मीर जलकर अपने अस्तित्व के मूल स्वरूप से हाथ धोता जा रहा है। यह राजनीतिक अदूरदर्शिता का ही परिणाम है कि समाधान में समर्थ लोगों को वहां कार्य नहीं करने दिया जाता। फलस्वरूप उग्रवादी कभी किसी का अपहरण कर लेते हैं, कभी लूट और मार-काट डालते हैं। लगता है वहां का प्रत्येक अहिंदू नागरिक उग्रवादियों का हमदर्द है।समस्या की उग्रता पर विचार करने के बाद अब उसके समाधान पर विचार कर लिया जाए। हमारे विचार में कश्मीर समस्या का पुख्ता और निर्णायक समाधान आज भी वही है जो आरंभ में स्वंय गांधीजी ने सुझाया था। वह है सैन्य बल से अधिकृत क्षेत्र को मुक्त कराना और भारत में संपूर्ण विलय। दूसरे धारा 370 को समाप्त करना भी बहुत आवश्यक है। इस प्रकार विशेष दर्जा तो समाप्त करना ही चाहिए, अतिरिक्त सुविधांए समाप्त कर समस्त भारतीय कानून भी वहां लागू होने चाहिए। पाकिस्तान से लगी सीमांए पूरी तरह सील कर दी जानी चाहिए। किसी के भी तुष्टीकरण की नीति त्यागी जानी चाहिए। हमारे विचार में कुल मिलाकर यही वे उपाय हैं जिन्हें अपनाकर आज के माहौल की भयानकता पर काबू पाया जा सकता है। इसके लिए चाहिए दृढ-संकल्प और साहस के साथ राष्ट्रीय साध्य का अदम्य उत्साह। यदि शासक दल ऐसा नहीं कर पाते तो कहा जाएगा कि वे महज सत्ता के भूखे और तन-मन से बौने लोग हैं-बस। The main objective of this website is to provide quality study material to all students (from 1st to 12th class of any board) irrespective of their background as our motto is “Education for Everyone”. 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Article 35A Reason of Kashmir.

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Reason of Kashmir Problem in Hindi संविधान की किताबों में न मिलने वाला अनुच्छेद 35A जम्मू-कश्मीर की विधान सभा को यह अधिकार देता है कि वह 'स्थायी नागरिक' की परिभाषा तय कर सके जून 1975 में लगे आपातकाल को. Our India is still a developing country, and one of the major obstacles on our path of development is illiteracy among our masses. One very efficient way to deal with this, would be to spread adult education. Every nook and corner of our country should get enlightened with the lamp of education and this should comprise of those adults too, who in their childhood had not been privileged enough to get education.

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Swan.

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Information about Kashmir in Hindi Language. हिंदी भाषा में कश्मीर के बारे में जानकारी. एस एशिया का एक खूबसूरत इलाका, कश्मीर को ऊंचा, बीहड़ वाले पहाड़ों से ढक दिया गया है, जिसमें हिमालय और काराकोरम पर्वतमाला शामिल हैं। सिंधु समेत. The Executive power of the Indian Union is vested in the President and is exercis­able by him in accordance with the provisions of the Constitution. (i) The President shall not be a member of either House of Parliament, of a House of the Legislature of any State, and if a member of either House of Parliament or of a House of Legislature of any State and elected as President, he shall be deemed to have vacated his seat in that House on the date of which he enters upon his office as President, (ii) the President shall not hold any other office of profit. The President is elected for a term of five years from the date on which he enters his office and is eligible for re-election (Articles 56-57). But his term office years maybe cut short if he (i) resigns (by writing addressed to the Vice-President), or (ii) is removed on charges of violation of the Constitution by the process of impeachment as laid down in the Constitution. In order to be qualified for election as President, a person must (i) be a citizen of India; (ii) have completed the age of thirty-five years; (iii) be qualified for election as member of the Lok Sabha and (iv) must not hold any office of profit under the government of India or the Government of any State or under any local or other authority subject to the control of any of the said Government (Article 58).

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BPSC Question Bank in Hindi - 2018-2019 StudyChaCha

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The Kashmiri language is traditionally written in the Sharada script after the 8th Century A. D. This script however, is not in common use today, except for religious ceremonies of the Kashmiri Pandits. Today it is written in Perso-Arabic and Devanagari scripts with some modifications. जम्मू और कश्मीर उत्तर भारत में स्थित राज्य है। कश्मीर के सीमांत क्षेत्र पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सिंक्यांग तथा तिब्बत हैं। कश्मीर प्रदेश को 'दुनिया का स्वर्ग' भी कहा जाता है। अधिकांश राज्य पर्वत, नदियों और झीलों से ढका हुआ है। कश्मीर की संस्कृति कई संस्कृतियों का एक विविध मिश्रण है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ साथ, कश्मीर में अपने सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है, यह हिंदू, सिख, बौद्ध और इस्लामिक ज्ञान विद्या को जोड़ती है| कश्मीर की संस्कृति का अर्थ कश्मीर की संस्कृति एवं परम्पराओं से हैं.

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Kashmir Conflict Essay - 8706 Words -

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The Kashmir conflict Hindi कश्मीर विवाद, Urdu کشمیر جھگڑا is a current territorial dispute over the Kashmir region, the northwesternmost region of South Asia. The countries disputing are India, Pakistan, China, and the Kashmiri people. India is the home of a very large number of languages. In fact, so many languages and dialects are spoken in India that it is often described as a ‘museum of languages’. In popular parlance it is often described as ‘linguistic pluralism’. The prevailing situation in the country is not pluralistic but that of a continuum. One dialect merges into the other almost imperceptibly; one language replaces the other gradually. Moreover, along the line of contact between two languages, there is a zone of transition in which people are bilingual. Thus lan­guages do not exist in water-tight compartments.

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Essay on clock in hindi language

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Apr 1, 2003. The Accession of the state of Jammu and Kashmir to India, signed by the Maharaja erstwhile ruler of the State on 26th October, 1947, was completely valid in terms of the Government of India Act 1935, Indian Independence Act 1947 and international law and was total and irrevocable. The Accession. Without proper rendering support, you may see question marks, boxes, or other symbols instead of Unicode characters. For an introductory guide on IPA symbols, see Help: IPA. Kashmiri is close to other Dardic languages spoken in Gilgit, Pakistan and in northern regions of Kargil, India. Outside the Dardic group, it has tonal aspects and loanwords of Arabic, Persian and Sanskrit, especially its northern dialects. and is a part of the eighth Schedule in the constitution of the Jammu and Kashmir.

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Indian History - पूरा विश्लेषण.

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Jan 6, 2017. Why India Doesn't Take Back PoK Hindi - Duration. Abhishek Shukla 2,191,377 views ·. कश्मीर समस्या क्या है? The Real history of Kashmir problem kashmir story since 1947 Truth - Duration. Business Ideas 13,082 views · · Article 370 - Kashmir - Legal GK and Legal. It is the land of many languages it is only in India people professes all the major religions of the world. The vast population is composed of people having diverse creeds, customs and colours. India presents endless varieties of physical features and cultural patterns. Some of the important forms of diversity in India are discussed below. The unique feature about India is the extreme largest mountains covered with snow throughout the year. The Himalayas or the adobe of snow is the source of the mighty rivers like Indus. These perennial rivers irrigate extensive areas in the North to sustain the huge population of the country.

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Essays on Kashmir Yatra In Hindi. Kashmir is a stunning and captivating land that abounds with natural beauty. Durga Puja In Hindi Language The Indian Adminstrative Services is special as it works internally for the smooth functioning of law and order without any hinderance. Right from the conception of the Indian constitution, IAS as a career has been a much preferred option for the Indian youth of all-time. Even today, jobs under IAS are considered with utmost esteem. This is the prime reason why youth are attracted to career of an IAS officer. Every year lakhs of aspirants from each corner of India apply for admission into IAS.

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Free Essays on Essay On Kashmir In Hindi. Get help with your writing. 1 through 30 - The valley of Kashmir has its ancient history and civilization. As Biscoe (2005: 67) confessed “Kashmir fortunately possesses an ancient history and a civilization more ancient than our own”. The land of the valley is very fertile and was known as seat of learning in the past. In fact, scholars came from different parts of the world in order to acquire knowledge from the ancient Kashmiri teachers and scholars. The history of the valley is divided into different periods – the first period was of Hindu rulers, the second was of Buddhism, the third was of Muslim rulers, the fourth was of Mughal rulers, the fifth was of Pathans and the sixth was of Dogra rulers....

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Essay of nature ... - English - Hindi Translation and Examples

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Ref का गलत प्रयोग; Bamzai4.6 नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है। ऊपर जायें ↑ सुभाष काक, The Wonder That Was Kashmir. In "Kashmir and its People Studies in the Evolution of Kashmiri Society. आपका मन, आपकी मांसपेशिया, आपके शरीर का हर एक अंग, सभी उस विचार से भरपूर हो. यही सफ़लता का तरीका हैं। "- स्वामी विवेकानन्द "Take up one idea. उसके बारे में सोचिये, उसके सपने देखिये, उस विचार को जिए. Make that one idea your life – think of it, dream of it, live on that idea. Let the brain, muscles, nerves, every part of your body, be full of that idea, and just leave every other idea alone. This is the way to success." - Excellence is an art won by training and habituation. Before you start some work, always ask yourself three questions – Why am I doing it, What the results might be and Will I be successful.

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क्या है जम्मू-कश्मीर में लागू धारा 370, पूर्ण विवरण | About 370 Act in Jammu and Kashmir in Hindi - Hindi Oneindia

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Article shared by. Read this essay on the “Problems of Kashmir” in Hindi language. 10020. Home ››. Related Essays Sample Essay on the “Problems of National Language” in Hindi · Sample Essay on the “Problems of Kashmir” in Hindi · Essay on the “Problems of Kashmir” in Hindi · Free sample essay on The Kashmir. ) is a state in northern India, often denoted by the acronym J&K. It is located mostly in the Himalayan mountains, and shares borders with the states of Himachal Pradesh and Punjab to the south. The Line of Control separates it from the Pakistani-administered territories of Azad Kashmir and Gilgit-Baltistan in the west and north respectively, and a Line of Actual Control separates it from the Chinese-administered territory of Aksai Chin in the east. The state has special autonomy under Article 370 of the Constitution of India. A part of the erstwhile Princely State of Kashmir and Jammu, the region is the subject of a territorial conflict among China, India and Pakistan.

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JAMMU & KASHMIR CULTURE AND TRADITION

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कश्मीर अपनी सुंदरता के कारण पृथ्वी का स्वर्ग माना जाता है। कश्मीर की घाटी भारत के हिमालय और पीए पंजाल पर्वत श्रंखला के बीच बसी है। जम्मू-कश्मीर भारत का सबसे उत्तरी राज्य है। जम्मू अपने प्राकृतिक सौंदर्य, प्राचिन मंदिरों, हिंदू. Whether you struggle to write an essay, coursework, research paper, annotated bibliography or dissertation, we’ll connect you with a screened academic writer for effective writing assistance. But if you happen to ever hit a snag, we’ve got your back! Grademiners is where all writers are tried and true, so you’ll work with a true expert knowledgeable in your subject. For one, you can conveniently put in a free revision request within 14 days after delivery. When you trust your assignment to us, we take it very seriously. This something hard to come by in the industry of essay help online. We supervise every order to ensure you get a piece that follows your specifications to a T. But we at Grademiners will gladly re-do your work for free if you feel like it needs improvement. With this in mind, our editorial staff checks all papers for consistency before delivery. In case revision is not applicable, we’ll refund your account, no questions asked.

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